ज्ञानचंद मर्मज्ञ

मेरे बारे में

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Bangalore, Karnataka, India
मैंने अपने को हमेशा देश और समाज के दर्द से जुड़ा पाया. व्यवस्था के इस बाज़ार में मजबूरियों का मोल-भाव करते कई बार उन चेहरों को देखा, जिन्हें पहचान कर मेरा विश्वास तिल-तिल कर मरता रहा. जो मैं ने अपने आसपास देखा वही दूर तक फैला दिखा. शोषण, अत्याचार, अव्यवस्था, सामजिक व नैतिक मूल्यों का पतन, धोखा और हवस.... इन्हीं संवेदनाओं ने मेरे 'कवि' को जन्म दिया और फिर प्रस्फुटित हुईं वो कवितायें,जिन्हें मैं मुक्त कंठ से जी भर गा सकता था....... !
!! श्री गणेशाय नमः !!

" शब्द साधक मंच " पर आपका स्वागत है
मेरी प्रथम काव्य कृति : मिट्टी की पलकें
रौशनी की कलम से अँधेरा न लिख
रात को रात लिख यूँ सवेरा न लिख
पढ़ चुके नफरतों के कई फलसफे
इन किताबों में अब तेरा मेरा न लिख

- ज्ञान चंद मर्मज्ञ

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शनिवार, 3 मार्च 2012

                                    रंग ऐसा लगाने का वादा करो 


चढ़ सके ना कभी जिस पर नफ़रत का रंग ,रंग ऐसा लगाने का वादा करो,
भर  के  हर साँस  में  प्रेम के रंग को ,हर  गिले  भूल  जाने  का  वादा  करो !


                                                 रास्ते  जब  भी  काँटे  उगाने  लगें , पाँव  जब   भी  तेरे  डगमगाने लगें,
                                                 टूट  जाएँ  सभी  सब्र  की  डोरियाँ , हिम्मतों   के  दीये  थरथराने  लगें ,
                                                 तब समूचे समन्दर   को एक साँस में ,अंजुरी  में उठाने का वादा करो !


 कौन  सा  रंग  किस  रंग  को  है मिला ,किस चमन  में  गुलाबों  का गुलशन खिला,
किसके रंगों को नोचा गया इस कदर,किसकी आँखों को रिमझिम का सावन मिला,
 पंख   नोचे   गए    तितलियों  के  जहाँ ,  वो  चमन   फिर  बसाने  का  वादा  करो !


                                          बात  रंगों  की  है  रंग वालों  की  है, अनकहे  अनबुझे  कुछ सवालों की है !
                                          जैसी तकदीर उनके गुलालों की है,वैसी किस्मत कहाँ  अपने गालों की है !
                                          हम  हज़ारों  क़दम  दौड़  कर आयेंगे ,पाँव तुम  भी उठाने  का  वादा करो !


लाल  रंगों  में  लिपटी  हुई  होलियाँ , खेलते  खेलते  शाम  ढल जाएगी,
फिर कोई भी सवेरा ना होगा कभी, बर्फ  की  ये कहानी पिघल जाएगी !
वक्त का हर दिया हो गया है धुआं,कुछ तो जलने जलाने का वादा करो !


                                         आसमाँ  से गिराई   गयीं  बिजलियाँ, हर  गली  में  लगाईं  गयी  बोलियाँ ,
                                         रंग परछाईयों में सिमटता गया,फिर भी ठहरी थीं विश्वास की तितलियाँ !
                                         एक  उम्मीद  काफ़ी  है मुस्कान को  ,यूँ  ही  हँसने  हँसाने  का वादा  करो !


                                                                                                                                    -ज्ञानचंद मर्मज्ञ 





48 टिप्‍पणियां:

पी.एस .भाकुनी ने कहा…

बात रंगों की है रंग वालों की है, अनकहे अनबुझे कुछ सवालों की है !........
बेहतरीन प्रस्तुति.........आपको स: परिवार होली की हार्दिक शुभकामनाये........

kshama ने कहा…

बात रंगों की है रंग वालों की है, अनकहे अनबुझे कुछ सवालों की है !
जैसी तकदीर उनके गुलालों की है,वैसी किस्मत कहाँ अपने गालों की है !
हम हज़ारों क़दम दौड़ कर आयेंगे ,पाँव तुम भी उठाने का वादा करो !
Bahut,bahut sundar!

संध्या शर्मा ने कहा…

हम हज़ारों क़दम दौड़ कर आयेंगे ,पाँव तुम भी उठाने का वादा करो !
बहुत सुन्दर अहसास... होली की बहुत-बहुत शुभकामनाएं........

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत बढ़िया प्रस्तुति!
रंगों के त्यौहार होलिकोत्सव की अग्रिम शुभकामनाएँ!

जयकृष्ण राय तुषार ने कहा…

सुन्दर कविता भाई मर्मग्य जी |होली की शुभकामनाएँ

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

इसी ऊर्जस्वित प्रवाह में बस जीवन निकल जाये..

Reena Maurya ने कहा…

बहुत ही सुन्दर रचना है
शानदार ..
आपको सहपरिवार होली की हार्दिक बधाई...

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

सुंदर ...मन को नयी ऊर्जा से भरते भाव ......

डॉ टी एस दराल ने कहा…

वाह !
होली पर बहुत सुन्दर रंग बिखेरे हैं ।
बधाई ।

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ ने कहा…

वाह!
आपके इस प्रविष्टि की चर्चा कल दिनांक 05-03-2012 को सोमवारीय चर्चामंच पर भी होगी। सूचनार्थ

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत सुंदर भाव ... होली की शुभकामनायें

anju(anu) choudhary ने कहा…

सर्वप्रथम ....आपके काव्यसंग्रह के लिए दिल से मुबारकबाद ...


होली की बहुत बहुत शुभकामनएं

सतीश सक्सेना ने कहा…

फिर कोई भी सवेरा ना होगा कभी,
बर्फ की ये कहानी पिघल जाएगी !

रंगोत्सव पर आपको शुभकामनायें भाई जी !

कुमार राधारमण ने कहा…

त्यौहार की असली भावना इन पंक्तियों में ही है। ये वादे गर पूरे किए जा सकें,तो रोज़ दीवाली मने।

इमरान अंसारी ने कहा…

बहुत खुबसूरत लगी पोस्ट। आपको भी होली की शुभकामनायें।

veerubhai ने कहा…

सुन्दर सकारात्मक भाव की सशक्त रचना ..भाव का विरेचन करती रचना .होली मुबारक .

सतीश सक्सेना ने कहा…

दुबारा पढने का दिल किया है मर्मज्ञ भाई ....
इस रचना के लिए बधाई !

उपेन्द्र नाथ ने कहा…

होली के रंगों से सराबोर बेहतरीन प्रस्तुति.
.
क्या सिलेंडर भी एक्सपायर होते है ?

sangita ने कहा…

बहुत ही सुन्दर रचना है ।आपको स: परिवार होली की हार्दिक शुभकामनाये।

Naveen Mani Tripathi ने कहा…

bahut hi sundar rachana ....holi pr hardik badhi

sangita ने कहा…

सर्वप्रथम आभार कि आपने मेरे ब्लॉग पर आकर मेरा मनोबल बढ़ाया सदैव स्वागत है।

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार ने कहा…

.


वाह मर्मज्ञ जी , बहुत सुंदर गीत लिखा है
आपकी लेखनी सदैव श्रेष्ठ ही लिखती है …

साधुवाद !

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार ने कहा…

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♥ होली ऐसी खेलिए, प्रेम पाए विस्तार ! ♥
♥ मरुथल मन में बह उठे… मृदु शीतल जल-धार !! ♥



आपको सपरिवार
होली की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं !
- राजेन्द्र स्वर्णकार
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प्रसन्न वदन चतुर्वेदी ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति....बहुत बहुत बधाई...होली की शुभकामनाएं....

mahendra verma ने कहा…

कौन सा रंग किस रंग को है मिला ,किस चमन में गुलाबों का गुलशन खिला,
किसके रंगों को नोचा गया इस कदर,किसकी आँखों को रिमझिम का सावन मिला,
पंख नोचे गए तितलियों के जहाँ , वो चमन फिर बसाने का वादा करो !

रंगों के इस गीत में जीवन के व्यावहारिक दर्शन की स्पष्ट झलक भी है।

होली की शुभकामनाएं।

प्रतिभा सक्सेना ने कहा…

बहुत सकारात्मक-सार्थक सवाल उठाये हैं आपने .
वादा करनेवाले, पता नहीं, कितने मिलें !
शुभकामनायें.

Rakesh Kumar ने कहा…

बहुत ही शानदार भावपूर्ण प्रेरक प्रस्तुति है आपकी.
होली की हार्दिक शुभकामनाएँ.

Anupama Tripathi ने कहा…

सुंदर भाव ...

नयना ने कहा…

bahut hi sundar..badhai :)

दिगम्बर नासवा ने कहा…

कौन सा रंग किस रंग को है मिला ,किस चमन में गुलाबों का गुलशन खिला,
किसके रंगों को नोचा गया इस कदर,किसकी आँखों को रिमझिम का सावन मिला,
पंख नोचे गए तितलियों के जहाँ , वो चमन फिर बसाने का वादा करो ..

आमीन ... ये वादा सभी मिल के करें तो जीवन कितना आसान हो जायगा ... बहुत ही सुन्दर और प्रेरक गीत है होली के रंगों को सार्थक करता हुवा ...
आपको होली की मंगल कामनाएं ...

रंजना ने कहा…

बहुत बहुत बहुत ही सुन्दर...


भाव,प्रवाह,चिंतन ,प्रेरणा ....सब बेजोड़..अप्रतिम...

Shanti Garg ने कहा…

बहुत ही बेहतरीन रचना....
मेरे ब्लॉग

'विचार बोध'
पर आपका हार्दिक स्वागत है।

रविकर ने कहा…

बहुत बढ़िया सर जी |
मुलाकात होती रहेगी ||

अभिषेक प्रसाद ने कहा…

aapke likhi kavita padhne ka mauka aaj mila... afsos ho raha hai ki pahle kahan tha... sach mein behtareen abhivyakti hai... aapki kitaab kahan milegi...

Trupti Indraneel ने कहा…

सहज सुन्दर !

शिखा कौशिक ने कहा…

bahut sundar .aabhar


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प्रसन्न वदन चतुर्वेदी ने कहा…

सुन्दर अभिव्यक्ति.....बधाई.....

expression ने कहा…

बहुत बहुत सुंदर.......
बेहतरीन रचना...........

अनु

Kailash Sharma ने कहा…

आसमाँ से गिराई गयीं बिजलियाँ, हर गली में लगाईं गयी बोलियाँ ,
रंग परछाईयों में सिमटता गया,फिर भी ठहरी थीं विश्वास की तितलियाँ !
एक उम्मीद काफ़ी है मुस्कान को ,यूँ ही हँसने हँसाने का वादा करो !

....बहुत सुन्दर अहसास....बेहतरीन प्रस्तुति..

आशा जोगळेकर ने कहा…

समूचे समन्दर को एक साँस में ,अंजुरी में उठाने का वादा करो !

क्या बात है ज्ञानचंद जी बेहद खूबसूरत ।

सतीश सक्सेना ने कहा…

कहाँ हैं मर्मज्ञ जी ...

Kumar Radharaman ने कहा…

आपने काफी समय से कुछ लिखा नहीं है। अपनी लेखनी को शिथिल न पड़ने दें।

आशा जोगळेकर ने कहा…

एक उम्मीद काफ़ी है मुस्कान को ,यूँ ही हँसने हँसाने का वादा करो !

वाह उम्मीद पे दुनिया कायम है । बेहतरीन प्रस्तुति ।

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार ने कहा…

बनी रहे… त्यौंहारों की ख़ुशियां हमेशा हमेशा…

ஜ●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬●ஜ
♥~*~दीपावली की मंगलकामनाएं !~*~♥
ஜ●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬●ஜ
सरस्वती आशीष दें , गणपति दें वरदान
लक्ष्मी बरसाएं कृपा, मिले स्नेह सम्मान

**♥**♥**♥**●राजेन्द्र स्वर्णकार●**♥**♥**♥**
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Kumar Radharaman ने कहा…

एक कवि की आशावादिता कभी मरती नहीं है। यही ऊर्जा किसी भी साहित्य का प्राण होती है।

सतीश सक्सेना ने कहा…

कहाँ हैं मर्मज्ञ जी ??
शुभकामनायें !

आशा जोगळेकर ने कहा…

आसमाँ से गिराई गयीं बिजलियाँ, हर गली में लगाईं गयी बोलियाँ ,
रंग परछाईयों में सिमटता गया,फिर भी ठहरी थीं विश्वास की तितलियाँ !
एक उम्मीद काफ़ी है मुस्कान को ,यूँ ही हँसने हँसाने का वादा करो !

बहुत सुंदर प्रस्तुति । होली की शुभकामनाएं ।

Manu Tyagi ने कहा…

प्रिय ब्लागर
आपको जानकर अति हर्ष होगा कि एक नये ब्लाग संकलक / रीडर का शुभारंभ किया गया है और उसमें आपका ब्लाग भी शामिल किया गया है । कृपया एक बार जांच लें कि आपका ब्लाग सही श्रेणी में है अथवा नही और यदि आपके एक से ज्यादा ब्लाग हैं तो अन्य ब्लाग्स के बारे में वेबसाइट पर जाकर सूचना दे सकते हैं

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