ज्ञानचंद मर्मज्ञ

मेरे बारे में

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Bangalore, Karnataka, India
मैंने अपने को हमेशा देश और समाज के दर्द से जुड़ा पाया. व्यवस्था के इस बाज़ार में मजबूरियों का मोल-भाव करते कई बार उन चेहरों को देखा, जिन्हें पहचान कर मेरा विश्वास तिल-तिल कर मरता रहा. जो मैं ने अपने आसपास देखा वही दूर तक फैला दिखा. शोषण, अत्याचार, अव्यवस्था, सामजिक व नैतिक मूल्यों का पतन, धोखा और हवस.... इन्हीं संवेदनाओं ने मेरे 'कवि' को जन्म दिया और फिर प्रस्फुटित हुईं वो कवितायें,जिन्हें मैं मुक्त कंठ से जी भर गा सकता था....... !
!! श्री गणेशाय नमः !!

" शब्द साधक मंच " पर आपका स्वागत है
मेरी प्रथम काव्य कृति : मिट्टी की पलकें
रौशनी की कलम से अँधेरा न लिख
रात को रात लिख यूँ सवेरा न लिख
पढ़ चुके नफरतों के कई फलसफे
इन किताबों में अब तेरा मेरा न लिख

- ज्ञान चंद मर्मज्ञ

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रविवार, 20 मार्च 2011

मंदिर का रंग लगे फ़ीका मस्जिद का रंग उड़ा सा है



                                                   जाने कैसी ये होली है 


   आँसू   में  रंग  घुला  बैठे  जाने  कैसी  ये  होली  है
   उम्मीदों  को  बहला  बैठे जाने  कैसी  ये   होली  है 

        दंगों  की आहट होते  ही  दुल्हन विधवा  हो जाती है
        फिर  भी  हम  माँग सजा बैठे जाने कैसी ये होली है 

  हाथों में एक मशाल लिए आँखों में लाख सवाल लिए
  कितने  खुद  को  पिघला बैठे  जाने  कैसी ये होली है 

         मंदिर का रंग लगे फ़ीका मस्जिद का रंग उड़ा सा है
         खूं  से  इनको  नहला  बैठे  जाने  कैसी  ये  होली  है

  रंगों  के  इस बाज़ार से वो जब भी गुज़रे हैं चुपके से
  अपना  हर  रंग  छुपा  बैठे जाने  कैसी  ये   होली है 

          दुनियाँ के रंग निराले हैं दिखते सफ़ेद जो काले हैं
          किस रंग  से रंग मिला बैठे जाने कैसी ये होली है

  रोटी  के  रंगों  की  कीमत  भूखों ने पूछा जब उनसे
  व्यापारी  थे  झुझला  बैठे  जाने  कैसी  ये  होली  है 

        बेबस ममता के रंगों की पहचान करेगी क्या दुनियाँ
        जब  बेटे  ही  झुठला  बैठे  जाने  कैसी  ये  होली  है 

  इस भीड़ में गाँधी बुद्ध नहीं हमें शांति चाहिए युद्ध नहीं 
  नन्हा  सा  मन  दहला  बैठे  जाने  कैसी  ये  होली  है
 
        बस तीन  रंग  के  दीवाने  'मर्मज्ञ'  शहीदों  की होली
        हम  भूल  गए  बिसरा  बैठे   जाने   कैसी ये होली है
  
                            होली की अनन्त शुभकामनाएं.........                              
                                                        -ज्ञानचंद मर्मज्ञ